बज़ट में डिपो धारकों की अनदेखी से डिपो धारक निराश 

प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए 2025-26 के बजट में पी डी एस डिपो धारकों को सरकार ने पूरी तरह से नज़र अंदाज़ किया है। प्रदेश डिपो संचालक समिति के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कवि ने ज़ारी ब्यान में कहा कि हालांकि कांग्रेस पार्टी ने आम विधानसभा चुनावों से पूर्व प्रदेश के डिपो धारकों को 20 हजार मासिक वेतन व वन टाईम लाइसेंस की व्यवस्था करने का वायदा किया था, लेकिन प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बने लगभग ढाई वर्ष होने को हैं इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने अभी तक प्रदेश के डिपो धारकों के साथ किए वायदे को पूरा नहीं किया है। अशोक कवि ने कहा कि प्रदेश के डिपो धारकों को सरकार के इस बजट से काफ़ी उम्मीदें थीं, लेकिन सरकार ने इस बजट में भी हमारी अनदेखी की। कवि ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने चुनावों के दौरान हमारे साथ वायदा करके हमें इस्तेमाल किया , लेकिन अब प्रदेश के डिपो धारकों को इस तरह दरकिनार किया जैसे सरकार प्रदेश के डिपो धारकों को न तो हिमाचली मानती है और न ही हिमाचल के मतदाता। प्रदेश सरकार द्वारा डिपो धारकों की अनदेखी तो की ही साथ में प्रदेश सरकार द्वारा लंबे अरसे से प्रदेश के राशन कार्ड धारकों को अनुदान पर मिलने वाली दालों, खाद्य तेल व चीनी के लिए भी बजट में कोई प्रावधान नहीं किया। इससे लगता है कि सरकार इन खाद्य पदार्थों को भी बंद करने जा रही है। अशोक कवि ने कहा कि अब तो सरकार ने बी पी एल चयन की प्रक्रिया भी बदल दी जिससे प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को बी पी एल श्रेणी से बाहर कर दिया जाएगा। बी पी एल परिवारों की संख्या कम होने से डिपो धारकों को कमीशन का भी नुक़सान उठाना पड़ेगा। कवि ने कहा कि डिपो धारकों को वेतन देना तो दूर की बात है सरकार की इस सोच से तो डिपो धारकों को कमीशन के भी लाले पड़ जाएंगे। प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार ने डिपो धारकों की मांगों पर शीघ्र फैसला नहीं लिया तो प्रदेश के डिपो संचालक प्रदेश भर में आंदोलन करने पर मजबूर होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

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